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Motivation 6 may 2020

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बुराई चाहे जितनी बड़ी हो लेकिन अच्छाई के सामने वो हमेशा छोटी रहती है |

Vichaar

भगवान हर इंसान को एक जैसा बनाया है – दो हाथ, दो पैर, दो आँखे, दो कान और एक बहुत ही शानदार मस्तिष्क (दिमाग)| लेकिन हर व्यक्ति की जिंदगी अलग-अलग होती है| कुछ व्यक्ति जिंदगी की यात्रा में निरन्तर रूप से सफलता प्राप्त करते जाते है और वही कुछ व्यक्तियों की जिंदगी निराशा और दुखों के अँधेरे में ही बीत जाती है| इसका एक ही कारण है – “नजरिया – Attitude

विद्‌यार्थी जीवन

विद्‌यार्थी जीवन साधना और तपस्या का जीवन है । यह काल एकाग्रचित्त होकर अध्ययन और ज्ञान-चिंतन का है । यह काल सांसारिक भटकाव से स्वयं को दूर रखने का काल है । विद्‌यार्थियों के लिए यह जीवन अपने भावी जीवन को ठोस नींव प्रदान करने का सुनहरा अवसर है । यह चरित्र-निर्माण का समय है । यह अपने ज्ञान को सुदृढ़ करने का एक महत्त्वपूर्ण समय है । विद्‌यार्थी जीवन पाँच वष की आयु से आरंभ हो जाता है । इस समय जिज्ञासाएँ पनपने लगती हैं । ज्ञान-पिपासा तीव्र हो उठती है । बच्चा विद्‌यालय में प्रवेश लेकर ज्ञानार्जन के लिए उद्‌यत हो जाता है । उसे घर की दुनिया से बड़ा आकाश दिखाई देने लगता है । नए शिक्षक नए सहपाठी और नया वातावरण मिलता है । वह समझने लगता है कि समाज क्या है और उसे समाज में किस तरह रहना चाहिए । उसके ज्ञान का फलक विस्तृत होता है । पाठ्‌य-पुस्तकों से उसे लगाव हो जाता है । वह ज्ञान रस का स्वाद लेने लगता है जो आजीवन उसका पोषण करता रहता है । विद्‌या अर्जन की चाह रखने वाला विद्‌यार्थी जब विनम्रता को धारण करता है तब उसकी राहें आसान हो जाती हैं । विनम्र होकर श्रद्धा भाव से वह गुरु के पास जाता है तो गुरु...